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Ashok Lahiri Appointed As Full-time Member Of The 15th Finance
Commission - 15वें वित्त आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार
अशोक लाहिड़ी
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Commission - 15वें वित्त आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार
अशोक लाहिड़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 04 May 2018 05:57 AM IST
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पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी को 15 वें वित्त आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त कर दिया गया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश में इसकी जानकारी दी गई है।
लाहिड़ी फिलहाल एनके सिंह की अध्यक्षता में आयोग के अंशकालिक सदस्य के पद पर कार्यरत हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने लाहिड़ी की पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
बता दें कि आयोग अपनी रिपोर्ट अक्टूबर 2019 तक सौंपेगा। आयोग केंद्र व राज्य सरकारों के वित्त, घाटे, ऋण स्तर व राजकोषीय अनुशासन प्रयासों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर रहा है। यह राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाव देगा।
नए वित्त आयोग की सिफारिशें एक अप्रैल 2020 से शुरू होने वाले पांच साल की अवधि के लिए होंगी। उल्लेखनीय है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल में होता है। आयोग केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है।
पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी को 15 वें वित्त आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त कर दिया गया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश में इसकी जानकारी दी गई है।
लाहिड़ी फिलहाल एनके सिंह की अध्यक्षता में आयोग के अंशकालिक सदस्य के पद पर कार्यरत हैं। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने लाहिड़ी की पूर्णकालिक सदस्य के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है।
बता दें कि आयोग अपनी रिपोर्ट अक्टूबर 2019 तक सौंपेगा। आयोग केंद्र व राज्य सरकारों के वित्त, घाटे, ऋण स्तर व राजकोषीय अनुशासन प्रयासों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा कर रहा है। यह राजकोषीय स्थिति मजबूत करने की व्यवस्था पर सुझाव देगा।
नए वित्त आयोग की सिफारिशें एक अप्रैल 2020 से शुरू होने वाले पांच साल की अवधि के लिए होंगी। उल्लेखनीय है कि वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत हर पांच साल में होता है। आयोग केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है।